देहरादून की महिलाओं ने पुलिस के आकड़ो को दिखाया आईना, 400 लोगों की राय पूरे शहर की राय नहीं
देहरादून, 03 सितंबर। हाल ही में एक निजी संस्था द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि देहरादून देश में महिलाओं के लिए 10 सबसे असुरक्षित शहरों में है। इस पर देहरादून पुलिस की ओर से जारी किए गए आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। दून की महिलाओं का भी मानना है कि केवल 400 लोगों की राय पूरे शहर की राय नहीं हो सकती। Uncut 24×7 ने भी राजधानी की महिलाओं की राय जानी।

राजधानी के एक नामी स्कूल की शिक्षिका और पीएचडी स्कॉलर ईशा रानी का मानना है कि देहरादून देश के कई शहरों के मुकाबले महिलाओं के लिए सुरक्षित है। शिक्षा नगरी के रूप में विख्यात इस शहर में आसपास के बहुत से शहरों की छात्राएं पढ़ती हैं। यहां तक की कई अन्य राज्यों से भी लोग अपनी बेटियों को सुरक्षित शहर मानकर यहां पढ़ने भेजते हैं।
हरियाणा के हिसार की शिवानी भी यही मानती हैं वह क्लेमेंट टाउन स्थित एक निजी विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और दो साल से यहां पढ़ाई कर रही हैं। उनके माता-पिता ने इस शहर के सुरक्षित माहौल को देखते हुए ही उन्हें यहां अकेले पढ़ने के लिए भेजने का फैसला किया। पिछले दो सालों में उन्हें कभी यह शहर असुरक्षित नहीं लगा।

शिक्षिका रश्मि नैथानी पंत का भी यही मानना है कि देहरादून में महिलाएं बेझिझक कभी भी कहीं भी आ–जा सकती हैं। कामकाजी महिलाएं और युवतियां देर रात भी सुरक्षित आती जाती हैं।
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स्वाति रतूड़ी बताती है कि देहरादून उन्हें कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। परिवार वाले भी उनके बाहर आने जाने के दौरान कभी चिंतित नहीं रहे।

शिमला बायपास निवासी आशा कुड़ियाल का कहना है कि दूसरे शहरों में जिस प्रकार की घटनाएं देखने और सुनने को मिलती हैं उससे तो लगता है कि देहरादून कई शहरों के मुकाबले महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित है।

साईंलोक कॉलोनी निवासी प्रकृति नेगी बताती है कि स्कूल कॉलेज के दिनों में वह कभी अगर देर से घर आती थी तो घर वाले चिंतित जरूर होते थे। लेकिन, उन्हें कभी भी बाहर आने जाने में डर महसूस नहीं हुआ। सेलाकुई निवासी

प्रियंका ढौंडियाल जॉब करती हैं और रोज शहर आती जाती हैं। प्रियंका बताती हैं कि कभी-कभी उन्हें शाम को देर हो जाती है। इतना लंबा सफर करने में भी उन्हें कभी ऐसा डर नहीं लगा कि वह इस शहर को असुरक्षित माने।

क्लेमेंट टाउन निवासी रितिका कहती हैं कि इस रिपोर्ट से जुड़ी खबरें पढ़कर उन्हें लगा जैसे कि जानबूझकर इस शहर को बदनाम किया जा रहा है। रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कुछ महिलाओं की राय से कैसे पूरे शहर को असुरक्षित बताया जा सकता है।

एमकेपी कॉलेज की छात्रा वृंदा का कहना है कि आज महिलाएं इतनी जागरूक हो चुकी हैं कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सजग रहती हैं और देहरादून जैसे शहर में उनके लिए डर जैसा माहौल नहीं है।

शिक्षिका अमिता ग्रोवर का कहना है कि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बहुत से कदम उठाए हैं। हेल्पलाइन नंबर 1090 पर महिलाओं आसानी से अपनी शिकायत दर्ज कर सकती हैं और बाजारों में उनकी मदद के लिए पिंक बूथ भी बनाए गए हैं।
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इस रिपोर्ट के मीडिया में प्रकाशित होने के बाद राजधानी की पुलिस ने भी आंकड़े जारी किए। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि निजी कंपनी पी वैल्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट पर राज्य महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही किसी सरकारी एजेंसी द्वारा कराया गया है। रिपोर्ट महज़ 12,770 महिलाओं के टेलीफोनिक इंटरव्यू पर आधारित है, जिसमें देहरादून से केवल 400 महिलाओं की राय ली गई, जबकि यहां महिला आबादी लगभग 9 लाख है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि केवल 4% महिलाएं सुरक्षा संबंधी एप का इस्तेमाल करती हैं, जबकि हकीकत यह है कि गौरा शक्ति एप में ही 1.25 लाख महिलाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 16,649 देहरादून की हैं। अगस्त 2025 में डायल 112 पर आई 12,354 शिकायतों में से सिर्फ 2,287 महिलाओं से जुड़ी थीं और इनमें से 1,664 घरेलू विवाद से संबंधित थीं। छेड़छाड़ और यौन अपराधों की शिकायतों की संख्या मात्र 11 रही, यानी कुल महिला शिकायतों का औसत 1% से भी कम।
पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 13 मिनट रहा। महिला सुरक्षा के लिए देहरादून में वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प डेस्क, SOS बटन, गौरा चीता पेट्रोलिंग यूनिट, पिंक बूथ और एकीकृत सीसीटीवी नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं संचालित हैं।
वर्तमान में शहर में 14 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं। पुलिस के अनुसार सर्वे में दिखाए गए आंकड़े वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में पुलिस पेट्रोलिंग के मामले में देहरादून का स्कोर 33% है, जबकि सबसे सुरक्षित बताए गए कोहिमा का स्कोर केवल 11% है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के मामले में देहरादून का स्कोर राष्ट्रीय औसत से बेहतर (6% बनाम 7%) है।
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार देहरादून का एनसीआरबी डेटा भी बताता है कि यहां अपराध दर मेट्रो शहरों की तुलना में काफी कम है। यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और पर्यटक सुरक्षित माहौल में रहते और पढ़ाई करते हैं।



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