देहरादून में खुला राज्य का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र DDRC

देहरादून में खुला राज्य का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र DDRC

DDRC inaugration
DDRC के उद्घाटन कार्यक्रम में अतिथिगण

महापौर सौरभ थपलियाल ने किया शुभारंभ, DDRC में एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएं

देहरादून, 03 सितंबर। दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय, देहरादून में उत्तराखंड का पहला जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र DDRC बुधवार को शुरू हो गया। इस केंद्र की सबसे खास बात यह है कि यहां दिव्यांगों को प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आधार पंजीकरण एवं अपडेट, फिजियोथेरेपी, काउंसलिंग, इलाज, कृत्रिम अंग और उपकरणों के साथ ही रोजगार प्रशिक्षण तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

DDRC inaugration
DDRC के उद्घाटन कार्यक्रम में दिव्ययांगों के साथ अतिथिगण

महापौर सौरभ थपलियाल ने केंद्र का शुभारंभ करते हुए इसे देहरादून ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र दिव्यांगजनों को समावेशी स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे उनका जीवन आसान होगा और “सशक्त दिव्यांग, सशक्त समाज” की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी। इसी अवसर पर उन्होंने डीडीआरसी का हेल्पलाइन नंबर 8077386815 जारी किया और दिव्यांग अनिल कुमार ढौंडियाल व नीरज बिष्ट को श्रवण यंत्र वितरित किए। साथ ही आर्ट प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग छात्रों को सम्मानित भी किया गया।

विधायक खजानदास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को “दिव्यांग” नाम दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल समाज में गरिमा और आत्मगौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देहरादून प्रशासन ने राज्य का पहला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित कर इस सोच को आगे बढ़ाने का प्रशंसनीय कार्य किया है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि समाज की करीब 20 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता से प्रभावित है और यह संख्या बहुत बड़ी है। ऐसे में उनके जीवन को सरल बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एकीकृत सुविधा केंद्र की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने बताया कि अब दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र, आधार अपडेट, उपचार, परामर्श, उपकरण और प्रशिक्षण जैसी सभी सेवाएं एक ही जगह मिलेंगी। साथ ही, केंद्र तक दिव्यांगजनों को लाने-ले जाने के लिए एक विशेष डेडिकेटेड वाहन भी तैनात किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि इस पुनर्वास केंद्र को लगातार बेहतर बनाने के लिए सभी सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह के बाद अतिथियों ने केंद्र में बने वाक चिकित्सा कक्ष, स्पीच थेरेपी कक्ष, अर्ली इंटरवेंशन रूम और फिजियोथेरेपी कक्ष का निरीक्षण भी किया। डीडीआरसी का संचालन समाज कल्याण विभाग की निगरानी में मुनीशाभा सेवा सदन एवं पुनर्वास संस्थान द्वारा किया जाएगा। यहां पंजीकरण के बाद दिव्यांगजनों को चिकित्सकीय, सामाजिक, शैक्षिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर परामर्श और सेवाएं दी जाएंगी। जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। विशेषज्ञों की बहु-विषयी टीम—जिसमें फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट और काउंसलर शामिल हैं—इस केंद्र पर दिव्यांगजनों को समग्र पुनर्वास सेवाएं प्रदान करेगी।

उद्घाटन कार्यक्रम रायपुर विधायक खजानदास की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महापौर सौरभ थपलियाल और विशिष्ट अतिथि के रूप में पार्षद सुनीता मंजखोला मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिलाधिकारी सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर ढौंडियाल सहित बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और उनके परिजन भी शामिल हुए।

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By Raju Pushola

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