मानव शरीर के भीतर खोजा गया ‘मैकेनिकल सुपरहीरो’

कोशिकाओं की रक्षा करता है ये अदृश्य ‘बॉडीगार्ड’
देहरादून, 6 सितंबर। मानव शरीर के भीतर हर क्षण एक अदृश्य संघर्ष चलता रहता है। कोशिकाओं के सूक्ष्म जगत में प्रोटीन लगातार खिंचाव, दबाव और मोड़ जैसी यांत्रिक ताकतों का सामना करते हैं। यही प्रोटीन हमारी कोशिकाओं के सुचारू कामकाज की नींव हैं, लेकिन जब वे तनाव के आगे झुक जाते हैं तो हृदय की मांसपेशियों की बीमारियां या लेमिनोपैथी जैसे आनुवंशिक विकार जन्म लेते हैं। इसी पृष्ठभूमि में वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा छिपा हुआ प्रोटीन खोजा है, जो इन परिस्थितियों में कोशिकाओं का अभेद कवच बनकर उन्हें टूटने से बचाता है।
इस नए ‘सुपरहीरो’ का नाम है P47। अब तक इसे केवल P97 नामक एक बड़े प्रोटीन का सहायक माना जाता था, जो प्रोटीन को तोड़ने और स्थानांतरित करने का कार्य करता है। लेकिन एसएन बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र (SNBNCBS) के वैज्ञानिक डॉ. शुभाशीष हलधर और उनकी टीम ने प्रयोगों के माध्यम से सिद्ध किया कि P47 सिर्फ एक हेल्पर नहीं, बल्कि प्रोटीन को तनाव से बचाने वाला सक्रिय प्रहरी है।
टीम ने ‘सिंगल-मोलेक्यूल मैग्नेटिक ट्विजर्स’ नामक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए वे एक-एक प्रोटीन अणु पर नियंत्रित बल डाल सकते थे। परिणाम चौंकाने वाले थे। उन्होंने देखा कि जैसे ही प्रोटीन खिंचाव में आया, P47 सीधे उससे जुड़ गया और उसे स्थिर बनाए रखने में मदद की। इससे प्रोटीन लगातार तनाव के बावजूद अपनी मूल संरचना में लौटने लगे। वैज्ञानिकों ने इसे “मैकेनिकल चैपरोन” की भूमिका कहा—अर्थात् ऐसा संरक्षक जो कोशिकाओं के भीतर प्रोटीन को टूटने से रोकता है।
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारी समझ को एक नया आयाम देती है। अब तक सहायक प्रोटीन को सिर्फ सहयोगी माना जाता था, लेकिन P47 यह दिखाता है कि ये भी कोशिकाओं को यांत्रिक तनाव से बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पत्रिका बायोकेमिस्ट्री में प्रकाशित इस अध्ययन ने चिकित्सा विज्ञान के सामने नई संभावनाओं का द्वार खोला है। हृदय रोगों और आनुवंशिक विकारों जैसे जटिल रोगों के इलाज में अब P47 जैसे ‘मैकेनिकल बॉडीगार्ड’ को लक्षित कर दवाएं विकसित की जा सकती हैं। यह न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रोमांचक है, बल्कि लाखों मरीजों के लिए आशा की नई किरण भी है।
शरीर के भीतर छिपा यह ‘सुपरहीरो’ हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ी लड़ाइयाँ हमारी कोशिकाओं के अदृश्य संसार में लड़ी जाती हैं—और वही हमारे भविष्य को सुरक्षित करने की ताकत रखती हैं।


