हरित आवरण बचाने और आपदाओं से निपटने पर विशेषज्ञों का साझा मंच
देहरादून, 09 सितंबर। आईसीएफआरई और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। विशेषज्ञों ने जलवायु प्रतिरोधी शहरों, हरित आवरण और सरकारी पहलों पर अपने विचार साझा किए।
मंगलवार को आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला ने संयुक्त रूप से एक दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन (Regional Research Conference – RRC) का आयोजन किया। इस वर्ष का विषय था – “जलवायु प्रतिरोधी शहरों के निर्माण में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका”। सम्मेलन का शुभारंभ डॉ. डी.पी. खली, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं समूह समन्वयक (अनुसंधान) के स्वागत भाषण से हुआ। वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की निदेशक डॉ. रेनू सिंह ने शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अमृत, स्मार्ट सिटी मिशन और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना जैसी सरकारी पहलों की जानकारी भी साझा की। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

शहरी हरियाली और सरकारी पहल
- डॉ. मनीषा थपलियाल, निदेशक, हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने नगर वन योजना जैसी सरकारी पहल की चर्चा की।
- हरियाणा के सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक श्री जगदीश चंदर ने घटते हरित आवरण और शहरी वनों में जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
आपदाएं और जीवनशैली में बदलाव
- उत्तराखंड के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डॉ. समीर सिन्हा ने हालिया आपदाओं का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण हेतु जीवनशैली में छोटे बदलावों की अपील की।
शहरी चुनौतियां और समाधान
- देहरादून नगर आयुक्त नमामि बंसल ने अतिक्रमण, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित आवरण क्षरण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
- भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. क्षमा गुप्ता ने हरित छतों, शहरी पार्क और सुदूर संवेदन तकनीकों के महत्व पर प्रस्तुति दी।
- वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वनीत जिस्टु ने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में शहरी वानिकी को रेखांकित किया।
100 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी और विभिन्न हितधारक शामिल थे। सम्मेलन में शहरी हरित क्षेत्र के महत्व, जलवायु परिवर्तन से जूझते शहरों की चुनौतियों और जनसहभागिता पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम का समापन वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभाग की प्रमुख और वैज्ञानिक ‘एफ’ डॉ. पारुल भट्ट कोटियाल के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।


