‘पिस्टल’ की ‘हनक’ से हो रही ‘लाचार’ की मदद

राइफल क्लब फंड बना गरीबों का सहारा, डीएम बंसल की अनोखी मुहिम

देहरादून, 09 सितंबर। रिवॉल्वर, पिस्टल और राइफल रखने का शौक इन दिनों सुरक्षा के साथ–साथ फैशन भी बन गया है। लेकिन क्या असलाह रखने की इस ‘हनक’ और ‘टशन’ से किसी की मदद भी की जा सकती है? तो जवाब है ‘हां’ और इसके लिए किसी को ये हथियार दिखाने की जरूरत नहीं है। बस इसकी लाइसेंस फीस ही काफी है। जो एक ‘लाइसेंस क्लब फंड’ में जमा हो जाती है। राजधानी देहरादून के प्रशासन ने इस फंड का इस्तेमाल गरीबों और असहायों के लिए करके एक मिसाल पेश की है। डीएम सविन बंसल इस फंड से जरूरतमंदों को लाखों रुपए की मदद कर चुके हैं।
आजादी के बाद जब राज्य सरकारों ने हथियार रखने वालों के लिए नियम बनाए तो इसके लिए एक फीस भी निर्धारित की गई। इस रकम को एक फंड के रूप में रखने का निर्णय हुआ। 1959 मैं बनाए गए इस फंड का नाम
राइफल क्लब फंड रखा गया। इसमें नए शस्त्र लाइसेंस, नवीनीकरण, सीमा विस्तार, विक्रय अनुमति, एनओसी और अन्य प्रक्रियाओं के लिए ली जाने वाली फीस जमा होती है। पहले लोग असलाह सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए रखते थे लेकिन बदलते समाज में हथियार रखना मानो फैशन सा बन गया। शुरुआत में चांद रूपों में ही हथियार का लाइसेंस बन जाता था लेकिन आज न केवल हथियारों की संख्या बाड़ी बल्कि इसकी लाइसेंस फीस भी हजारों रुपए है। 1959 शस्त्र अधिनियम के तहत
राइफल क्लब फंड में जमा हो जाती है। देहरादून जिला प्रशासन ने राइफल क्लब फंड को एक ऐसे माध्यम के रूप में सामने रखा है, जिसके जरिए समाज के निर्धन, असहाय और अक्षम लोगों की मदद की जा रही है। जिलाधिकारी सविन बंसल के प्रयासों से इस फंड का उपयोग अब उन परिवारों तक पहुंच रहा है, जो न सिर्फ आर्थिक कठिनाई से जूझ रहे हैं, बल्कि सामाजिक मुख्यधारा से भी दूर हो जाते हैं।
मंगलवार को डीएम ने राइफल क्लब फंड से छह असहाय और जरूरतमंदों को 1.35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद धर्मपुर निवासी मीनाक्षी रतूड़ी के बच्चों का स्कूल से नाम कटने की नौबत आ गई थी। ऐसे में डीएम द्वारा 25 हजार रुपये की मदद ने न सिर्फ उनका संबल लौटाया, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी बच गई। इसी तरह विजय कॉलोनी निवासी कैंसर पीड़ित शारदा देवी और ऋषिकेश की दीपा देवी को इलाज के लिए 25-25 हजार रुपये की सहायता दी गई। डालनवाला के इजाजुद्दीन, जो आंखों की रोशनी खो चुके हैं, को बेटी की शादी के लिए 25 हजार रुपये का सहयोग मिला। बडोवाला निवासी दिव्यांग जितेंद्र, जिनका बिजली कनेक्शन बिल न भरने पर कट गया था, को भी 25 हजार रुपये की सहायता दी गई। वहीं क्लेमनटाउन निवासी दिव्यांग अब्दुल रहमान को स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीन खरीदने हेतु 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली।
अब तक जिले में राइफल क्लब फंड से 11.05 लाख रुपये की राशि विभिन्न असहाय वर्गों को दी जा चुकी है। इससे पहले इसी फंड से झुग्गी बस्ती में बालवाड़ी मरम्मत, विधवा महिला के बिजली बिल भुगतान, अनाथ बच्ची के पिता द्वारा लिए गए बैंक ऋण की अदायगी, गरीब महिला को स्वरोजगार के लिए धनराशि तथा ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के स्कूल वाहन हेतु सहयोग जैसी कई मिसालें सामने आ चुकी हैं।
डीएम सविन बंसल ने कहा कि राइफल क्लब मूलभूत आवश्यकताओं से अलग एक ‘लक्जरी ट्रांजेक्शन’ है और इसका सदुपयोग समाज के कमजोर वर्ग की मदद के लिए किया जा रहा है। उन्होंने लाभार्थियों से अपील की कि इस आर्थिक सहायता को केवल उपभोग तक सीमित न रखकर निवेश के रूप में उपयोग करें ताकि उनका जीवन खुशहाल बन सके।


