‘सिल्ट’ से बढ़ रहा नदियों का जलस्तर, भविष्य में जानमाल के नुकसान की आशंका
देहरादून, 11
सितंबर। आपदा की मार झेल रहे उत्तराखंड में भूस्खलन से केवल जान–माल का नहीं बल्कि एक खतरा और बढ़ गया है। और वह है पहाड़ों से नदियों में आने वाला मालवा। यह न केवल बहाव का रुख मोड रहा है बल्कि इससे नदियों में भारी मात्रा में सिल्ट जमा हो रहा है जिसके कारण जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रहता है। यह बात उत्तराखंड के दौरे पर आई केंद्रीय अंतर–मंत्रालयी टीम ने अपनी रिपोर्ट में कही है।केंद्रीय टीम ने माना कि जलस्तर बढ़ने से भविष्य में और नुकसान की आशंका बनी हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में बुधवार को भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने मुलाकात की। इस टीम ने उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में हुए नुकसान का जायजा लिया है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व वाली टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों से बातचीत की और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों की सराहना की। टीम ने कहा कि राहत शिविरों में रहने, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था संतोषजनक है।
उत्तराखंड में लगातार भूस्खलन और बाढ़ से हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां एक बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करना बेहद जरूरी है ताकि भूस्खलन जैसी घटनाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
केंद्रीय प्रतिनिधियों ने सरकार की उन पहलों की भी तारीफ की जिनके तहत मृतकों के परिजनों और पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घरों के मालिकों को 5-5 लाख रुपये की तत्कालिक सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और डेटा की लगातार निगरानी को उन्होंने अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय पहल बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बादल फटने और भूस्खलन जैसी आपदाओं से राज्य की जमीन को स्थायी नुकसान होता है। कई बार प्रभावित स्थानों पर दोबारा खेती या निर्माण संभव नहीं रह जाता। इसलिए आपदा से पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन, अपर मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद स्वरूप भी मौजूद रहे।


