उत्तराखंड त्रासदी पर ‘आप’ का हमला: सरकार और एजेंसियां पर उठाए सवाल!
देहरादून, 18 सितंबर। उत्तराखंड में लगातार हो रही भीषण बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने इस साल सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। हजारों परिवार प्रभावित हुए, सैकड़ों घर और गाँव तबाह हो चुके हैं और अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों पर सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस उत्तराखंड त्रासदी के बीच सरकार और संबंधित एजेंसियों की विफलता पर कड़े सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य वैज्ञानिक संस्थाएँ समय रहते चेतावनी देने और राहत सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रही हैं।
कृत्रिम बारिश और विदेशी ताकतों पर संदेह
AAP ने आरोप लगाया कि रोज़ाना रात 2 से 5 बजे के बीच हो रही असामान्य बारिश की वैज्ञानिक रिपोर्ट क्यों नहीं जारी की गई। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पहाड़ों को खाली कराने की साज़िश के पीछे विदेशी ताकतें तो नहीं हैं। साथ ही, 1951 में टाटा फर्म द्वारा पश्चिमी घाट में करवाई गई क्लाउड सीडिंग की तरह क्या उत्तराखंड में भी कृत्रिम बारिश कराई जा रही है? यदि हाँ, तो इसकी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही? AAP ने सरकार से पूछा कि हर साल आपदाओं से सैकड़ों मौतें और हजारों करोड़ का नुकसान होने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग और सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली क्यों विकसित नहीं की गई?
उच्च स्तरीय वैज्ञानिक और न्यायिक जांच की मांग
AAP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सचिन थपलियाल ने कहा कि जब पूरी व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं तो जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने माँग की कि उत्तराखंड की मॉनसून आपदा की उच्च स्तरीय वैज्ञानिक और न्यायिक जांच कराई जाए। इसके लिए IIT रुड़की, ISRO और स्वतंत्र संस्थाओं को शामिल किया जाए। पार्टी ने माँग की है कि पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, पहाड़ों पर उन्नत आपदा चेतावनी प्रणाली जैसे राडार और मोबाइल अलर्ट की स्थापना की जाए। AAP ने यह भी कहा कि विकास के नाम पर हो रही जंगलों की कटाई, अंधाधुंध निर्माण और भारी मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगे तथा मध्य हिमालय क्षेत्र में आपदा के असली कारणों की विशेष जांच हो।


