नाग–नंदी और उल्लू भी सनातन संस्कृति का प्रतीक

नाग–नंदी और उल्लू भी सनातन संस्कृति का प्रतीक

मुख्यमंत्री धामी ने किया वन्य जीव प्राणी सप्ताह का शुभारंभ

देहरादून, 4 अक्टूबर 2025। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून जू में वन्य जीव प्राणी सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में वन्य जीवों के हमले से होने वाली जनहानि पर अब परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि 10 लाख रुपए कर दी जाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का वाहन मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवायूजन कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू और देवाधिदेव महादेव के कंठ पर विराजमान नागराज और साथ बैठे नंदी हमारी सनातन संस्कृति में मानव और जीव-जगत के बीच एकात्म भाव के प्रतीक हैं। इसी कारण प्राचीन काल से ही भारत में वन्यजीवों का संरक्षण जीवन पद्धति का स्वाभाविक अंग रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव विहारों और संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के रूप में सुरक्षित है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात मात्र 5.27 प्रतिशत है। यह राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां की हरियाली और स्वतंत्र विचरण करते वन्यजीव देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार वनों के प्राकृतिक स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग को निर्देश दिया कि हर जिले में एक नए पर्यटन स्थल की पहचान कर उसे प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए विकसित किया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नया इको-टूरिज्म मॉडल लागू किया जा रहा है ताकि लोग जंगलों से जुड़ें, लेकिन प्रकृति को क्षति न पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की संख्या में राज्य में उत्साहजनक वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ा है। इसे कम करने के लिए सरकार ड्रोन और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा किए जा रहे हैं ताकि वे जंगल और वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भागीदार बन सकें।

धामी ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” योजना भी गति पकड़ रही है, जिसके तहत युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म आधारित कौशल से जोड़कर उन्हें उद्यमी बनाया जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में छात्रों के लिए इको क्लबों के माध्यम से वन्यजीवों से संबंधित शैक्षिक यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है और इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी का संतुलन ही प्रदेश को आगे ले जाएगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक समीर सिन्हा, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) रंजन कुमार मिश्रा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

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By Raju Pushola

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