दुबई के बाजार में पहुंचा गढ़वाल का सेब

दुबई के बाजार में पहुंचा गढ़वाल का सेब

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया में शेयर की जानकारी

देहरादून: 25अगस्त। सेब उत्पादन में उत्तराखंड के बढ़ते कदम अब एक लंबी छलांग लगा चुके हैं। गढ़वाल का सेब दुबई के बजारों में बिकने के लिए पहुंच चुका है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव सुनील बर्थवाल ने रविवार को देहरादून से दुबई के लिए गढ़वाली सेब (किंग रोट किस्म) की पहली ट्रायल खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 1.2 मीट्रिक टन की इस खेप को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की पहल पर तैयार किया गया है। यह पहल उत्तराखंड से कृषि उत्पादों के निर्यात को नई दिशा देने वाला एक अहम कदम माना जा रहा है।

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने गढ़वाल के सेब की दुबई भेजी गई पहली खेप की जानकारी दी है और लिखा है ‘देहरादून टू दुबई’। गढ़वाली सेबों की यह खेप केवल एक शुरुआत है, जिसके जरिये शीत श्रृंखला प्रबंधन, फसल कटाई के बाद हैंडलिंग और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को और बेहतर बनाने का अनुभव मिलेगा। एपीडा और उत्तराखंड सरकार की साझेदारी से आने वाले समय में और अधिक किसान समूहों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप जैसे नए निर्यात बाज़ारों में भी उत्तराखंड के कृषि उत्पादों की पहचान बनने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

इस मौके पर हितधारकों के साथ बातचीत में सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि भारत के कृषि निर्यात बास्केट को विविधता देना बेहद ज़रूरी है और गढ़वाली सेब जैसे विशिष्ट क्षेत्रीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं तक पहुँचाना इसी दिशा में अहम प्रयास है। उन्होंने एपीडा, उत्तराखंड सरकार, निर्यातकों और किसान समूहों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए जैविक खेती और जैविक निर्यात को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने उत्तराखंड से कृषि निर्यात की अपार संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि बासमती चावल, मोटे अनाज, राजमा, मसाले, सुगंधित पौधे, शहद, सेब, कीवी, आम, लीची, आड़ू, बीन्स, मटर, करेला और आलू जैसे उत्पाद राज्य को वैश्विक निर्यात मानचित्र पर और मजबूती से खड़ा कर सकते हैं। उन्होंने एपीडा को निर्देश दिया कि प्रदेश में अपने क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि किसानों और निर्यातकों को स्थानीय स्तर पर ही सहयोग मिल सके।

एपीडा ने भी उत्तराखंड के कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत करने की अपनी रूपरेखा साझा की है। इसी कड़ी में एपीडा उत्तराखंड में पौधरोपण अभियानों को भी बढ़ावा दे रहा है। सुगंधित पौधों के केंद्र, देहरादून के सहयोग से पौड़ी जिले में 2,200 तिमरु के पौधों का रोपण किया गया है। यह पहल सतत खेती को बढ़ावा देने और भविष्य में इनके निर्यात की संभावनाएं तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

uncut24x7.com

By Raju Pushola

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