लिलियम की महक से आत्मनिर्भर बनेंगी उत्तराखंड की महिलाएं

मुख्यमंत्री के प्रोत्साहन से फूलों की खेती कर आगे बढ़ रही पौड़ी के कोट ब्लॉक की माता–बहनें
देहरादून/पौड़ी। 28 अगस्त। भौगोलिक परिस्थितियां पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में चुनौती के साथ–साथ अवसर भी प्रदान करती है। आम तौर पर पहाड़ों में खेती करना आसान नहीं होता। लेकिन, कुछ फसलों और पौधों के लिए यहां का वातावरण बेहद अनुकूल होता है। खासकर फूलों की खेती के लिए उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं। पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक की महिलाएं लिलियम फूलों की खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं। यह पहल न केवल आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को नवाचार और आधुनिक खेती से जोड़कर उन्हें नई पहचान भी दिला रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार का “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” का सपना धीरे-धीरे साकार होता नज़र आ रहा है। उद्यान विभाग, ग्रामोत्थान परियोजना और एनएचएलएम के सहयोग से कोट ब्लॉक में 22 पॉली हाउस तैयार किए गए हैं। पहले चरण में आठ पॉली हाउसों में महिला समूहों ने हॉलैंड से आयातित ओरिएंटल और डासिंग स्टार वैरायटी के लिलियम फूलों की खेती शुरू की है। सरकार की ओर से महिलाओं को जिला योजना के अंतर्गत 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग और बाजार की उपलब्धता की गारंटी भी प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है।
लिलियम की खेती से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ए-ग्रेड फूलों की कीमत 80 रुपये, बी-ग्रेड की 70 रुपये और सी-ग्रेड की 60 रुपये तक निर्धारित की गई है। इस आधार पर यहां की महिलाएं प्रति वर्ष लगभग 10 लाख रुपये की आय का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। यह प्रयास उनके जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की आर्थिकी को भी सुदृढ़ करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को उत्तराखण्ड की मातृशक्ति की उपलब्धि बताते हुए कहा कि कोट ब्लॉक की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा – “यह सिर्फ फूलों की खेती नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। हमारी सरकार हर बेटी और हर महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के सपने को साकार करने में हमारी मातृशक्ति सबसे बड़ी सहभागी बनेगी।”
धामी ने आगे कहा कि उनका संकल्प है कि प्रदेश की हर बेटी और हर महिला अपने सपनों को पंख दे सके। उन्होंने विश्वास जताया कि पौड़ी की धरती से उठी लिलियम की यह खुशबू आने वाले समय में पूरे उत्तराखण्ड की पहचान बनेगी।
यह पहल राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण और नवाचार आधारित खेती की परिकल्पना को न केवल मजबूती दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान कर रही है। लिलियम की खुशबू से आत्मनिर्भरता की यह नई कहानी अब उत्तराखण्ड की पहाड़ियों से निकलकर पूरे देश में गूंजने लगी है।


