बसुकेदार में बादल फटने से भारी तबाही, कुछ लोग लापता, घर–दुकानें मलबे में तब्दील, गाड़ियां बही

देहरादून/रुद्रप्रयाग: 29अगस्त। जनपद रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई। तहसील बसुकेदार अंतर्गत बड़ेथ डुंगर तोक सहित कई गांवों में अचानक मलबा आने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई घर, दुकानें, सड़कें और खेती की भूमि मलबे में दब गईं, वहीं कुछ वाहनों के बहने और लोगों के लापता होने की भी सूचना सामने आई है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन आपदा कंट्रोल रूम से लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को मौके पर तैनात कर दिया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करने और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
प्रभावित गांवों से मिल रही जानकारी के अनुसार स्यूर गांव में एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया है और बोलेरो वाहन बह गया। बड़ेथ, बगडधार और तालजामनी गांवों में गदेरे उफान पर आने से दोनों ओर मलबा भर गया है। किमाणा गांव में खेती की जमीन और सड़कों पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा आ गया है। अरखुण्ड क्षेत्र में मछली तालाब और मुर्गी फार्म पूरी तरह बह गए हैं। वहीं छेनागाड़ बाजार में दुकानों और सड़कों पर मलबा भर गया है और कई वाहन भी बह गए। छेनागाड़ डुगर गांव और जौला बड़ेथ से कुछ लोगों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।
जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों को चिह्नित कर राहत दल भेजे जा रहे हैं। एनएच, पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई की अलग-अलग टीमें बंद रास्तों को खोलने में जुटी हुई हैं ताकि बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। राजस्व निरीक्षकों और अन्य कार्मिकों को भी गांव-गांव भेजकर हालात का जायजा लिया जा रहा है।
प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाई जाएगी। सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। फिलहाल प्राथमिक लक्ष्य मलबे में दबे लोगों की खोज और सुरक्षित स्थलों तक निकासी सुनिश्चित करना है।
यह प्राकृतिक आपदा एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों की नाजुक भौगोलिक स्थिति और आपदा प्रबंधन की चुनौती को सामने लेकर आई है। प्रशासनिक अमला राहत और बचाव कार्यों में पूरी ताकत से जुटा हुआ है, लेकिन हालात सामान्य होने में समय लग सकता है।


