आपदा का कहर : 24 घंटे में सात की मौत, 11 लापता, अगले चार दिन राहत के आसार नहीं

देहरादून,30अगस्त। उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। बीते 24 घंटों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश ने तबाही का ऐसा मंजर खड़ा किया है कि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं, नदियाँ उफान पर हैं और बिजली गिरने की घटनाओं ने कई परिवारों को मातम में डुबो दिया है। इस आपदा ने एक मासूम बच्चे और एक दंपति समेत सात लोगों की जान ले ली। गढ़वाल में चार और कुमाऊं में तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा 11 लोग अब भी लापता हैं, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

आपदा की विभीषिका इतनी गहरी है कि कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़कर जान बचाने को मजबूर हो गए। भारी बारिश से भूस्खलन के कारण अनेक सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई गाँव पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट गए हैं। कुछ जगहों पर बिजली आपूर्ति ठप हो चुकी है और मोबाइल नेटवर्क भी ठप पड़ गया है, जिससे लोगों को अपनों से संपर्क करने में कठिनाई हो रही है।

भारी बारिश का यह क्रम अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। देहरादून समेत कई जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ गर्जन और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कुछ जिलों में स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। विभाग का कहना है कि दो सितंबर तक प्रदेश को भारी वर्षा से राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ फिलहाल भय और अनिश्चितता की गिरफ्त में हैं। आसमान से बरस रही आफत ने लोगों की नींद और चैन छीन लिया है। पहाड़ के लोग एक-एक पल दहशत में जी रहे हैं कि अगला खतरा कब और कहाँ से आ जाए। प्रशासन और राहत एजेंसियाँ पूरी कोशिश में जुटी हैं, लेकिन लगातार बरसते बादलों और टूटी हुई सड़कों के बीच उनकी राह भी आसान नहीं है। यह आपदा एक बार फिर याद दिला रही है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना असहाय है और पहाड़ों में जिंदगी कितनी मुश्किल।


