GPS की मदद से खोजे गए कल्पकेदार
धराली आपदा में कई फीट मलबे के नीचे दब गया था मंदिर GPS
धराली, 31अगस्त। उत्तरकाशी जनपद के गंगोत्री धाम मार्ग पर स्थित धराली का प्राचीन और ऐतिहासिक कल्पकेदार मंदिर पांच अगस्त 2025 को आई भीषण आपदा में खीरगंगा नदी के सैलाब की चपेट में आकर मलबे में दब गया था। इस आपदा के बाद मंदिर का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय लोग और श्रद्धालु लगातार इसकी खोज में लगे हुए थे, लेकिन भारी मलबे और भूगोल के बदल जाने के कारण मंदिर की सटीक स्थिति का पता लगाना असंभव हो गया था। अब GPS के माध्यम से मंदिर की वास्तविक स्थिति का पता चल गया है।
दरअसल, कल्पकेदार मंदिर समिति ने आधुनिक तकनीक (GPS) की मदद से मंदिर का स्थान खोज निकालने में सफलता प्राप्त की है। समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार, सचिव संजय पंवार, संयोजक दुर्गेश पंवार, सहसचिव संतोष पंवार और सदस्य सचेंद्र पंवार ने 21 अगस्त को जीपीएस ट्रैकिंग(GPS) के सहारे मंदिर की सटीक लोकेशन चिह्नित की। खोज के बाद मंदिर स्थल पर पत्थरों के ढेर के बीच एक हनुमान ध्वजा स्थापित की गई और केंद्र से 20 मीटर के दायरे में बैरिकेड टेप भी लगाया गया है, ताकि भविष्य में जब भी भारी मशीनरी उपलब्ध हो, तब सुरक्षित ढंग से गर्भगृह तक खुदाई कर मंदिर को बाहर निकाला जा सके।
समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार का कहना है कि मंदिर का गर्भगृह सतह से लगभग सात मीटर नीचे सुरक्षित अवस्था में दबा हुआ है। उनका विश्वास है कि वहां स्थित प्राचीन शिवलिंग पूरी तरह सुरक्षित है और आपदा के बाद भी उसे कोई क्षति नहीं पहुंची होगी। जब भी परिस्थितियां अनुकूल होंगी और मशीनों की मदद मिल पाएगी, गर्भगृह तक पहुंचकर शिवलिंग को पुनः श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु प्रस्तुत किया जाएगा।
धराली का कल्पकेदार मंदिर न सिर्फ स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र था, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी यह अनिवार्य पड़ाव माना जाता था। गंगोत्री धाम के दर्शन के बाद अधिकांश यात्री धराली में रुककर जलमग्न शिवलिंग के दर्शन करना नहीं भूलते थे। यह मंदिर गंगोत्री हाईवे से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित था और इसकी विशेषता यही थी कि गर्भगृह में स्थित शिवलिंग हमेशा जल में डूबा रहता था।
अब जबकि मंदिर का स्थान चिन्हित हो चुका है, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि निकट भविष्य में कल्पकेदार मंदिर पुनः अपने मूल स्वरूप में स्थापित होगा और धराली की पहचान फिर से जगमगाएगी।


