अन्नकूट पर्व से शुरू होगी चारधाम कपाट बंद होने की प्रक्रिया

देहरादून, 09 सितंबर। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। परंपरा के अनुसार दीपावली के अगले दिन पड़ने वाले अन्नकूट पर्व से चारधाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस बार अन्नकूट का पर्व 22 अक्टूबर को पड़ रहा है और इसी दिन गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए जाएंगे।
चारधाम यात्रा हर वर्ष दो चरणों में बंटी मानी जाती है। पहला चरण कपाट खुलने से लेकर जून के अंत तक चलता है, जबकि दूसरा चरण एक सितंबर से कपाट बंद होने तक माना जाता है। हालांकि जुलाई और अगस्त में भी यात्रा जारी रहती है, लेकिन मानसून के चलते यात्रियों की संख्या बेहद कम हो जाती है। इस वर्ष भी यात्रा का दूसरा चरण प्रारंभ हो चुका है, मगर गंगोत्री और यमुनोत्री में अब भी अपेक्षित चहल-पहल नजर नहीं आ रही है। बदरीनाथ और केदारनाथ में यात्री पहुंच रहे हैं, लेकिन खस्ताहाल सड़कों की स्थिति श्रद्धालुओं की यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना रही है।
परंपरा के अनुसार गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व पर बंद होते हैं। इसके अगले दिन यानी भैयादूज पर यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस वर्ष भैयादूज 23 अक्टूबर को पड़ रही है। इन तीनों धामों के कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम के कपाट अंत में बंद होंगे। सामान्यतः बदरीनाथ के कपाट अन्य तीन धामों की तुलना में लगभग पखवाड़े भर बाद बंद किए जाते हैं। कभी-कभी यह अंतर दस दिन का भी होता है। इस बार संभावना है कि बदरीनाथ धाम के कपाट छह या दस नवंबर को बंद किए जाएंगे। इसकी आधिकारिक घोषणा विजयादशमी के अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा की जाएगी।
इधर, चमोली जिले की भ्यूंडार घाटी में समुद्र तल से 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 10 अक्टूबर को बंद हो जाएंगे। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां सर्दी अन्य धामों की अपेक्षा पहले बढ़ जाती है। इसी कारण हर साल परंपरा के अनुसार 10 अक्टूबर को दोनों धामों के कपाट एक साथ बंद कर दिए जाते हैं।
चारधाम और हेमकुंड साहिब की इस कपाट बंद प्रक्रिया के साथ ही उत्तराखंड में धार्मिक यात्रा का यह वार्षिक अध्याय शीतकाल के लिए विराम ले लेगा। अब श्रद्धालु अगले वर्ष वसंत ऋतु में कपाट खुलने तक अपने आराध्य के शीतकालीन गद्दीस्थलों पर ही दर्शन और पूजन कर सकेंगे।


