भारी बारिश और आपदा की चुनौती के बीच केदारनाथ में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब

16 लाख 56 हजार यात्रियों ने किए बाबा केदार के दर्शन, टूटा 2024 का रिकॉर्ड
केदारनाथ, 09अक्टूबर 2025। बारिश और बर्फबारी के बावजूद चारधाम यात्रा एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है। श्रद्धालुओं के उत्साह ने इस बार केदारनाथ धाम में नया रिकॉर्ड बना दिया है। बुधवार तक यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 56 हजार से अधिक हो गई, जबकि पिछले वर्ष पूरे यात्राकाल में कुल 16 लाख 52 हजार 76 यात्रियों ने केदारनाथ के दर्शन किए थे। इस बार अभी कपाट बंद होने में करीब दो सप्ताह का समय बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।
बुधवार को अकेले केदारनाथ धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर बंद किए जाएंगे। यात्रा के इस अंतिम चरण में भी भक्तों का उत्साह चरम पर बना हुआ है।
प्रदेश के अन्य धामों—बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—में भी यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ही संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन से निपटने के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं ताकि मार्ग सुचारू बने रहें।
गौरतलब है कि इस वर्ष 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद दो मई को केदारनाथ और चार मई को बदरीनाथ धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। हालांकि मानसून सीजन में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने यात्रा को काफी प्रभावित किया। गंगोत्री धाम का प्रमुख पड़ाव धराली इस दौरान भारी तबाही का शिकार हुआ, जिसके कारण कुछ समय के लिए यात्रा रोकनी पड़ी।
बारिश थमने के बाद प्रशासन और बचाव दलों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए मार्गों को फिर से चालू किया। फिलहाल चारों धामों की यात्रा सामान्य रूप से चल रही है। प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने की अपील की है, विशेषकर खराब मौसम के दौरान यात्रा न करने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की सलाह दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा से जुड़े जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सभी अधिकारी अलर्ट मोड पर रहें और आपात स्थिति में राहत व बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।


