टूटी बेरहम सड़क ने ले ली एक मासूम नवजात की जान
कंधों पर ले जाई जा रही गर्भवती महिला ने रस्ते में दिया बच्चे को जन्म, अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

नारायणबगड़, 29 अगस्त। पहाड़ की सच्चाई अक्सर आँकड़ों और योजनाओं से कहीं अलग होती है, जहाँ ज़िंदगी और मौत के बीच की दूरी सिर्फ एक टूटी हुई सड़क तय कर देती है। शुक्रवार को नारायणबगड़ विकासखंड के दूरस्थ गाँव सिलोडी से स्वास्थ्य केंद्र की ओर आ रही एक गर्भवती महिला ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया। दुखद यह रहा कि अस्पताल पहुँचने तक नवजात ने दम तोड़ दिया।
32 वर्षीय कविता देवी, पत्नी कुँवर सिंह, को प्रसव पीड़ा शुरू होते ही ग्रामीणों ने डंडी पर बैठाकर पैदल यात्रा शुरू की। गाँव से करीब चार किलोमीटर दूर सड़क पूरी तरह से भूस्खलन के कारण बंद थी। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे आठ किलोमीटर पैदल परखाल तक महिला को पहुँचाया और वहाँ से निजी वाहन की मदद से नारायणबगड़ स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। लेकिन अस्पताल पहुँचते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
स्थानीय प्रतिनिधि हिमानी देवी ने गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि सड़क मार्ग पिछले आठ दिनों से बंद पड़ा है, जिससे पूरे क्षेत्र की जनता भारी परेशानी झेल रही है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से दोडिंग गधेरे में भूस्खलन के चलते यह मार्ग बार-बार बंद होता रहा है। उन्होंने विभाग की लापरवाही को सीधा जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हल्की बारिश में भी मार्ग बाधित हो जाता है और स्थायी समाधान की ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पीड़ा को उजागर करती है। विकास के दावों के बीच पहाड़ के गाँव अब भी टूटी सड़कों और विभागीय लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुका रहे हैं। आज कविता देवी का मासूम नवजात भले ही इस दुनिया में कदम रखते ही दुनिया छोड़ गया, लेकिन इस त्रासदी ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।


