आपदा पीड़ितों को मुआवजा राशि 72 घंटे में दी जाए, मुख्यमंत्री के आदेश
देहरादून, 21 अगस्त 2020। उत्तराखंड में आपदा राहत कार्य को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 72 घंटों के भीतर अनुग्रह राशि (मुआवजा) दी जाए। उन्होंने साफ किया है कि किसी भी स्थिति में इस काम में एक हफ्ते से ज़्यादा की देरी नहीं होनी चाहिए। यह आदेश मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के ज़रिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों को दिया है।
आपदा प्रबंधन की समीक्षा और सतर्कता के निर्देश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने आने वाले दिनों के लिए जारी किए गए ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है। उन्होंने नदियों और नालों के जल स्तर की लगातार निगरानी के निर्देश भी दिए।
सचिव ने कहा कि मानसून से हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजी जाए, ताकि केंद्र सरकार से अतिरिक्त धनराशि मांगी जा सके। सुमन ने ज़िलों से एसडीआरएफ, नॉन-एसडीआरएफ और एसडीएमएफ में खर्च हुई धनराशि का ब्यौरा भी मांगा। उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, आपदा राहत और पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त पैसा उपलब्ध है, जिसका समय पर उपयोग होना चाहिए।
भूस्खलन वाले इलाकों में लगाए जाएंगे चेतावनी बोर्ड
बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला ने भी सभी ज़िलों को हर समय सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि मानसून का डेढ़ महीना अभी भी बाकी है। रुहेला ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदियों के पास जागरूकता साइनेज लगाने का निर्देश दिया, ताकि आम जनता को समय पर अलर्ट किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए हर स्तर पर सतर्कता ज़रूरी है। इसके लिए सभी ज़िलों में रोज़ाना आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठकें आयोजित करने के साथ ही छात्रों और व्यापारियों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें आपदा से संबंधित जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में एसीईओ प्रशासन आनंद स्वरूप, एसीईओ क्रियान्वयन राजकुमार नेगी, डॉ. पूजा राणा, रोहित कुमार, हेमंत बिष्ट, डॉ. वेदिका पंत और तंद्रीला सरकार सहित कई अधिकारी मौजूद थे।


