डॉ. पसबोला को काशी हिन्दी विद्यापीठ ने प्रदान की मानद D Litt की उपाधि 

डॉ. पसबोला को काशी हिन्दी विद्यापीठ ने प्रदान की मानद D Litt की उपाधि

देहरादून, 15 अक्टूबर 2025। आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए काशी हिन्दी विद्यापीठ, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) ने देहरादून के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. (प्रो.) डी. सी. पसबोला को मानद उच्च डॉक्टरेट (Higher Honorary Doctorate – D Litt) की उपाधि से सम्मानित किया है। यह उपाधि विद्यापीठ की अकादमिक परिषद की अनुशंसा और कुलपति डॉ. संभाजी राजाराम बाविस्कर की स्वीकृति के बाद उपकुलपति एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. योगेश त्रेहन द्वारा प्रदान की गई।

डॉ. पसबोला को यह सम्मान हिन्दी भाषा के माध्यम से आयुर्वेद और योग की सेवा एवं प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है। उन्होंने हिन्दी को माध्यम बनाकर आयुर्वेदिक चिकित्सा, योग, प्राणायाम और ध्यान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। वे स्वयं आयुर्वेद स्नातक होने के साथ योग और ध्यान में प्रमाणित डिप्लोमा धारक हैं। अपने चिकित्सकीय अनुभव के आधार पर वे स्वस्थ लोगों को स्वास्थ्य रक्षा और रोगियों को प्रभावी उपचार प्रदान करते हैं।

डॉ. पसबोला आयुर्वेद विभाग के मीडिया प्रभारी के रूप में भी सक्रिय हैं और सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल माध्यमों से “हर घर आयुर्वेद”, “करो योग रहो निरोग” और “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” जैसे अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित कर चुके हैं। उनके इन प्रयासों से आयुर्वेद विभाग की पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।

यह गौरतलब है कि डॉ. पसबोला को छह माह पूर्व भी काशी हिन्दी विद्यापीठ द्वारा मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate – PhD) की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें मानद डबल प्रोफेसरशिप से भी अलंकृत किया जा चुका है, जो उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक और चिकित्सकीय योगदान का प्रमाण है।

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, देहरादून में चिकित्सा अधिकारी एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) के पद पर कार्यरत डॉ. पसबोला को आयुर्वेद चिकित्सा का 21 वर्षों का अनुभव है। वे एक कुशल एनसीडी रिवर्सल एक्सपर्ट भी हैं। उनके नाम कई विश्व रिकॉर्ड्स बुक्स में भी दर्ज हैं।

योग, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यास में दो दशकों से अधिक अनुभव रखने वाले डॉ. पसबोला अपने चिकित्सालय में प्रतिदिन योगाभ्यास करते हैं और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। वे हिन्दी भाषा को माध्यम बनाकर आयुर्वेद और योग की उपयोगिता को समाज के हर वर्ग तक पहुंचा रहे हैं।

uncut24x7.com

By Raju Pushola

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

विरासत में नन्हे हाथों की रचनात्मकता बिखरी, मिट्टी और रंगों में झलकी सृजन की चमक

Wed Oct 15 , 2025
विरासत में नन्हे हाथों की रचनात्मकता बिखरी, मिट्टी और रंगों में झलकी सृजन की चमक देहरादून, 15 अक्तूबर। राजधानी में चल रहे विरासत महोत्सव का बुधवार का दिन नन्हे-मुन्नों की रचनात्मकता के नाम रहा। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने कोमल हाथों से मिट्टी को आकार दिया, रंगों से कल्पनाएं रचीं और […]
विरासत में नन्हे हाथों की रचनात्मकता बिखरी, मिट्टी और रंगों में झलकी सृजन की चमक

You May Like

Chief Editor

Annu Pushola

Share
error: Content is protected !!