देहरादून में ‘विरासत महोत्सव’ का रंगारंग आगाज

छोलिया और उस्ताद अमजद अली खान की सरोद तान से सजी पहली शाम
देहरादून, 5 अक्टूबर 2025। सांस्कृतिक विरासत और भारतीय लोक कला की अद्भुत परंपरा को समर्पित विरासत आर्ट एंड हैरिटेज महोत्सव 2025 का भव्य आगाज़ शनिवार शाम हुआ। कौलागढ़ रोड स्थित ओएनजीसी के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह में महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने राष्ट्रगान के पश्चात दीप प्रज्वलन कर महोत्सव का शुभारंभ किया।

राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्वभर में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि हमारा देश मानवता के कल्याण की दिशा में विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किए जाने की भी सराहना की और कहा कि हमारी सभ्यता और संस्कृति हमारे गौरव का प्रतीक हैं, जिन्हें हमें सहेजकर रखना होगा।

रीच संस्था द्वारा आयोजित इस महोत्सव का यह 30वां संस्करण है, जिसने तीन दशकों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखा है। उद्घाटन समारोह में राज्यपाल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, संस्था के महासचिव आर.के. सिंह, संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी, महालेखाकार मोहम्मद परवेज आलम, शिल्प निदेशक सुनील वर्मा और मीडिया कोऑर्डिनेटर प्रियवंदा अय्यर समेत अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
पहली शाम की शुरुआत उत्तराखंड की लोक संस्कृति के प्रतीक छोलिया नृत्य से हुई, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। अल्मोड़ा की उद्यांचल कला समिति के 20 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस पारंपरिक नृत्य में तलवारों की झंकार और योद्धा मुद्रा ने दर्शकों को एक प्राचीन युद्ध नृत्य की झलक दी। कुमाऊँ क्षेत्र की यह नृत्य शैली विवाह और शुभ अवसरों पर की जाने वाली वीरता और सामंजस्य की प्रतीक है, जिसकी जड़ें एक हजार वर्ष से भी पुरानी परंपरा में हैं।
इसके बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के सरताज उस्ताद अमजद अली खान ने सरोद की मधुर तान से ऐसा वातावरण रचा कि पूरा स्टेडियम संगीत में डूब गया। उन्होंने राग गणेश कल्याण और राग देश की प्रस्तुति से कार्यक्रम का आगाज़ किया। उनके साथ तबले पर पंडित फतेह सिंह गंगानी और मिथिलेश झा ने मनमोहक संगत दी।


