एसटीएफ–दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नकल माफिया हाकम सिंह गिरफ़्तार

एसटीएफ–दून पुलिस गिरफ्त में हाकम सिंह और पंकज गौड़

एसटीएफ–दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नकल माफिया हाकम सिंह गिरफ़्तार

एसटीएफ–दून पुलिस गिरफ्त में हाकम सिंह और पंकज गौड़
एसटीएफ–दून पुलिस गिरफ्त में हाकम सिंह और पंकज गौड़

देहरादून, 21 सितम्बर। एसटीएफऔर दून पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह और एक अभ्यर्थी पंकज गौड़ को गिरफ्तार किया है। पंकज इस धाकधड़ी के खेल का सूत्रधार है।

एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर व एसएसपी दून अजय सिंह

पुलिस के अनुसार पंकज गोद जो खुद इस परीक्षा का परीक्षार्थी है ने कोचिंग कर रहे कुछ छात्रों से संपर्क किया।
उसने उन्हें झांसे में लेने का प्रयास किया कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में उन्हें पास करा सकते हैं। इसके एवज में 12 से 15 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों की योजना बेहद शातिर थी, अगर अभ्यर्थी का चयन स्वतः हो जाता तो यह रकम अपने पास रख ली जाती, और अगर असफल रहता तो अगले परीक्षाओं में पैसे “एडजस्ट” करने का झांसा देकर उसे दोबारा फंसाया जाता।

दरअसल, पुलिस और एसटीएफ को कुछ दिन पहले ही गुप्त सूचना मिली थी कि इस परीक्षा को लेकर एक गिरोह सक्रिय है और अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहा है। सूचना पर संयुक्त टीम ने गोपनीय जांच और सर्विलांस शुरू किया। इस दौरान पता चला कि उत्तरकाशी निवासी पंकज गौड़ अभ्यर्थियों से संपर्क कर रहा है और उन्हें हाकम सिंह के जरिए पास कराने का प्रलोभन दे रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों को पटेल नगर क्षेत्र से दबोच लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों में हाकम सिंह पुत्र केदार सिंह, निवासी ग्राम निवाड़ी, थाना मोरी, जनपद उत्तरकाशी (उम्र 42 वर्ष) और पंकज गौड़ पुत्र केशवानंद गौड़, निवासी ग्राम कंडारी, ब्लॉक नौगांव, थाना बड़कोट, जनपद उत्तरकाशी (उम्र 32 वर्ष) शामिल हैं। दोनों के खिलाफ कोतवाली पटेल नगर में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण) अध्यादेश 2023 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने साफ किया है कि इस पूरे मामले में परीक्षा की गोपनीयता और सुचिता पर कोई आंच नहीं आई है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गिरोह केवल अभ्यर्थियों से ठगी करने की नीयत से सक्रिय था और परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है।

 

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By Raju Pushola

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