ग्लेशियर को दी जिंदगी, 260 की जान ली और विदा हो गया मानसून

उत्तराखंड में सामान्य से 22 प्रतिशत अधिक हुई बरसात
देहरादून, 28 सितंबर। उत्तराखंड को जख्म देने के बाद आखिरकार प्रदेश से मानसून की विदाई की औपचारिक घोषणा हो गई है। शुक्रवार की देर शाम मौसम विभाग ने इस पर मुहर लगा दी है। इस बार मॉनसून के दौरान सामान्य से 22 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। विदा होने से पहले बादल फटने, लैंडस्लाइड और नदियों में उफान के कारण भारी जान–माल का नुकसान हुआ है। इस दौरान 260 से अधिक लोगों की मौत हुई। एक आंकलन के अनुसार 5700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान भी हुआ। लेकिन, वैज्ञानिकों के अनुसार इस मानसून में अधिक बर्फबारी से न सिर्फ ग्लेशियरों को फायदा हुआ है, बल्कि वाटर रिचार्ज होने की भी संभावना जताई गई है।

सामान्यत: प्रदेश में मानसून सीजन मे 1154 मिमी वर्षा दर्ज की जाती है, जो इस साल 1411.8 मिमी रिकार्ड की गई, जो सामान्य से 22 प्रतिशत है। प्रदेश में मानसून ने 20 जून को प्रवेश किया था। तब से विदाई तक के सफर पर नजर डालें तो जून में मेघ सामान्य से 36 फीसदी ज्यादा बरसे। वहीं जुलाई में यह आंकडा सामान्य से 16 प्रतिशत कम रहा, जबकि अगस्त में यह सर्वाधिक 50 प्रतिशत के उछाल पर जा पहुंचा। सितंबर में यह आंकडा 22 फीसदी ज्यादा रहा।मानसून सीजन पर गौर करें तो सर्वाधिक बारिश बागेश्वर जिले में दर्ज की गई। यहां यह सामान्य से 241 प्रतिशत अधिक रहा, वहीं पौडी जिले में मेघ सबसे कम बरसे। आंकडों के अनुसार यह सामान्य से 30 प्रतिशत कम रहे।

बादल फटने की घटनाओं की बात करें तो 2010 से 2020 के बीच बादल फटने की 29 बड़ी घटनाएं हुई। साल 2021 इसमें थोड़ा चौंकाने वाला रहा इस दौरान प्रदेश भर में 50 से अधिक बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई। उस साल प्रदेश में मानसून ने 308 लोगों की जान ली थी। 2025 की बात करें तो इस साल बादल फटने की 16 घटनाएं दर्ज की गई जिसमें से 9 बड़ी घटनाएं थी। जिसके कारण 260 से अधिक लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, और 100 के करीब अभी भी लापता हैं। जानकारी के अनुसार सरकार ने 5702.15 करोड़ की आर्थिक अनुमानित क्षति का आकलन किया है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से सहयोग भी मांगा है।
वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक मनीष मेहता के अनुसार निचले इलाकों में जहां अधिक बारिश के कारण भारी नुकसान हुआ है वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्र में अधिक बर्फबारी से ग्लेशियरों को फायदा मिलेगा। अगस्त माह में चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक फीट से अधिक बर्फबारी दर्ज की गई। जो ग्लेशियर्स के पोषण का काम करेगी। इसके साथ ही 22 प्रतिशत अधिक बरसात से ग्राउंडवाटर रिचार्ज होने की भी संभावना वैज्ञानिकों ने जताई है।
देहरादून स्थित राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार जम्मू-कश्मीर, लददाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से मानसून विदा हो गया है। जो कुछ दिनों में देश के शेष क्षेत्रों से भी रुखसत हो जाएगा। आने वाले दिनों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा।


