हाथ मलते रह गए ट्रंप, नहीं मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

ओस्लो, 11 अक्टूबर 2025। वर्ष 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है। इस बार यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है। नोबेल समिति ने मचाडो को लोकतंत्र की सच्ची आवाज बताते हुए कहा कि उन्होंने वेनेजुएला में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए अदम्य साहस दिखाया है। उन्हें 338 नामांकित उम्मीदवारों में से चुना गया। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार पर दावेदारी कर रहे अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को निराशा हाथ लगी है। नोबेल कमेटी ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना।
हालांकि इस घोषणा के बाद नॉर्वे में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। चर्चा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर इस निर्णय से नाराज हो सकते हैं। यह लगातार तीसरी बार है जब ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए विचार के बाद भी खारिज कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें 2018, 2021 और अब 2025 में भी यह सम्मान नहीं मिल सका।
राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई महीनों से इस पुरस्कार की दावेदारी कर रहे थे। उनका दावा था कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाई है। बताया जाता है कि इजरायल, रूस, अजरबैजान, पाकिस्तान, थाईलैंड, आर्मेनिया और कंबोडिया जैसे देशों ने उनके नाम का समर्थन किया था।
पुरस्कार की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चुइंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “नोबेल समिति ने राष्ट्रपति ट्रंप की शांति प्रयासों को नजरअंदाज कर राजनीति को प्राथमिकता दी है। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक शांति के लिए काम करते रहेंगे, युद्ध समाप्त करवाने की कोशिश जारी रखेंगे और लोगों की जान बचाने में जुटे रहेंगे। वे मानवीय संवेदनाओं से भरे हुए शख्स हैं।”
दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ट्रंप की उम्मीदें इस पुरस्कार को लेकर काफी बढ़ गई थीं, लेकिन एक बार फिर उन्हें निराशा हाथ लगी है। वहीं, मारिया कोरिना मचाडो के चयन ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नोबेल समिति लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनस्वर की ताकत को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।


