होमवर्क के डर से बच्चे छुपे जंगल में, पुलिस ने सुरक्षित परिजनों तक पहुँचाया

टिहरी गढ़वाल, 13 सितम्बर। किताबों और कॉपियों का बोझ तो बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन कभी-कभी वही बोझ डर में बदलकर मासूमों को भटका देता है। टिहरी में चार स्कूली बच्चे सिर्फ इसलिए स्कूल नहीं पहुँचे क्योंकि उन्होंने होमवर्क पूरा नहीं किया था। सज़ा के डर से वे यूनिफॉर्म और बैग झाड़ियों में छिपाकर जंगल की ओर निकल पड़े। गनीमत रही कि पुलिस की तत्परता से सभी बच्चों को सुरक्षित बरामद कर परिजनों के हवाले कर दिया गया।
घटना शुक्रवार सुबह की है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस को सूचना दी कि कुछ बच्चे अपने स्कूल बैग भजनगढ़ जंगल की झाड़ियों में छिपाकर और यूनिफॉर्म बदलकर कहीं निकल गए हैं। मामला गंभीर समझते हुए एसएसपी टिहरी आयुष अग्रवाल ने तत्काल टीम गठित कर बच्चों की तलाश शुरू कराई। ढालवाला मुनि की रेती पुलिस ने जंगल की छानबीन की तो बांस की झाड़ियों से चार स्कूल बैग मिले। इनमें बच्चों की कॉपियाँ, किताबें और यूनिफॉर्म रखी हुई थी।
बैग पर अंकित विवरण के आधार पर स्कूल प्रशासन और परिजनों से संपर्क किया गया। कई घंटों की तलाश के बाद आखिरकार रेलवे रोड ढालवाला से सभी बच्चे सकुशल मिल गए। पूछताछ में बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्होंने होमवर्क पूरा नहीं किया था और सज़ा के डर से स्कूल नहीं गए।
पुलिस ने बच्चों को समझाया और परिवार के हवाले कर दिया। साथ ही अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें, उनसे संवाद बनाकर रखें और उन्हें इस तरह के डर से बाहर निकालें।
यह घटना सिर्फ पुलिस की तत्परता का उदाहरण नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी आईना है। अक्सर हम बच्चों पर पढ़ाई और होमवर्क का इतना दबाव डाल देते हैं कि वे डर और संकोच में गलत फैसले लेने लगते हैं। जरूरी है कि अभिभावक बच्चों के लिए दोस्त और मार्गदर्शक दोनों बनें, ताकि छोटे-छोटे डर कभी बड़ी समस्याओं का कारण न बनें।


