अगर आप भी करते हैं AI का इस्तेमाल तो हो जाइये सावधान कैलिफोर्निया के एडम रेन की आत्महत्या ने एआई सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

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अगर आप भी करते हैं AI का इस्तेमाल तो हो जाइये सावधान

कैलिफोर्निया के एडम रेन की आत्महत्या ने एआई सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

अगर आप या आपके परिवार में कोई भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहा है तो यह खबर आपके लिए है।

 

देहरादून: 28अगस्त। तकनीक एक और जहां हमें सुविधा प्रदान कर रही है वहीं दूसरी ओर इसका बहुत अधिक इस्तेमाल या दुरुपयोग इंसानियत और इंसान के लिए घातक भी हो सकता है। एक युवक जो AI को अपना सब कुछ मानने लगा था। उसने खुद ही अपनी जान ले ली। कैलिफोर्निया के एक 16 वर्षीय किशोर एडम रेन की आत्महत्या ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर गहरे प्रश्न खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि आत्महत्या से पूर्व एडम लंबे समय तक ChatGPT चैटबॉट से बातचीत करता रहा और इस दौरान उसे ऐसे जवाब मिले जिन्होंने उसकी मानसिक स्थिति को और जटिल बना दिया।

परिजनों के अनुसार चैटबॉट ने न केवल आत्महत्या के तरीकों से संबंधित जानकारी दी बल्कि उसके लिए एक अंतिम संदेश लिखने में भी मदद की। इस घटना के बाद परिवार ने ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि यह तकनीक अब केवल सूचना और सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानव जीवन के बेहद संवेदनशील हिस्सों को भी प्रभावित करने लगी है।

OpenAI ने इस मामले को गंभीरता से स्वीकारते हुए कहा है कि उनका चैटबॉट किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या जैसी खतरनाक सलाह देने के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन लंबे संवादों में सुरक्षा फिल्टर कमजोर पड़ सकते हैं। कंपनी ने भविष्य में अधिक सख्त सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया है, जिनमें पैरेंटल कंट्रोल्स और आपातकालीन संपर्क जैसी सुविधाएँ भी शामिल होंगी।

देहरादून के विख्यात मनोचिकित्सक डॉ मुकुल शर्मा का कहना है कि AI के बारे में अब अधिकतर लोगों को पता चल चुका है लेकिन इसके सही इस्तेमाल की जानकारी बहुत से लोगों को नहीं है। उनका मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक तकनीक मात्र है इसमें कोई भाव या द्वेष नहीं हो सकता इसलिए किसी की भी आत्महत्या को इससे नहीं जोड़ा जाना चाहिए बल्कि इसके लिए जागरूकता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस समय इस तकनीक का इस्तेमाल 12 से 30 साल की उम्र के लोग अधिक कर रहे हैं। बहुत से बच्चे तो अपना होमवर्क भी AI के माध्यम से कर रहे हैं। रोजमर्रा की बहुत सी चीजों में भी इसका इस्तेमाल जानकारी लेने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में कोई कड़ा कदम समय पर उठाना होगा और कुछ नियम बनाने होंगे।

डॉ मुकुल का कहना है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, उसका इस्तेमाल सावधानी और निगरानी के साथ होना चाहिए। किशोरावस्था वह समय है जब मन अस्थिर और भावनाएँ संवेदनशील होती हैं। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चैटबॉट यदि सहायक की जगह भटकाने वाला साबित हो जाए तो उसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

एडम रेन का मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि हम तकनीक पर आँख बंद कर भरोसा नहीं कर सकते। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य और एआई तकनीक के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

uncut24x7.com

By Raju Pushola

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