इस बार नकल के धंदे का ‘मास्टरमाइंड’ नहीं ‘कंसल्टेंट’ बनकर उभरा हाकम

देहरादून, 21 सितंबर : कभी उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में नौकरी लगने की गारंटी माना जाने वाला हाकम सिंह एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार हाकम सिंह और पंकज गौड़ को एसटीएफ व दून पुलिस ने नए नकल विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया है। 2021 से लेकर 2022 तक हुई कई भर्ती परीक्षाओं में नकल करने वाले गिरोह के सरगना के रूप में पुलिस ने तब हाकिम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया था। तब से ही एसटीएफ की नजर हाकम सिंह की गतिविधियों पर थी। 2 दिन पहले पुलिस को सर्विलांस के जरिए उसकी इस संदिग्ध गतिविधि का पता चला और उसे उसके साथी सहित गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह रही कि इस बार हाकम सिंह इस खेल का मास्टरमाइंड नहीं बल्कि कंसल्टेंट था। आरोपी पंकज ने हाकम की मदद लेकर अभ्यर्थियों से रुपए ऐंठने की योजना बनाई थी जिसे पुलिस ने विफल कर दिया।
हाकम सिंह सबसे पहले सुर्खियों में तब आया था जब 2021 व 2022 में कई भर्ती परीक्षाएं विवाद में आने के बाद रद्द कर दी गई थी। इन परीक्षाओं में नकल कराने वाले गिरोह के सरगना के रूप में हाकम सिंह का नाम सामने आया। हाकम सिंह की राजनीतिक रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसकी तत्कालीन मुख्यमंत्री सहित कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों के साथ तस्वीरें सार्वजनिक हुई थी। कभी एक आईएएस के घर में खाना बनाने वाला हाकम नकल करने के इस गोरखधंधे से करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा।
2022 में हाकम सिंह सुर्खियों में तब आया था जब एक के बाद एक भर्ती परीक्षाओं में नकल कराने के मामले सामने आए। 2021 में हुई तीन मुख्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद तो इसके भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का एक सिलसिला ही शुरू हो गया था जिससे सरकार को भारी फजियत का सामना करना पड़ रहा था। ऑनलाइन वन दरोगा भर्ती परीक्षा, सचिवालय रक्षक भर्ती, वाहन चालक भर्ती, कार्यालय अनुदेशक भर्ती, मुख्य आरक्षी पुलिस दूरसंचार, पुलिस रैंकर्स भर्ती परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया। बढ़ते दबाव और युवाओं के आंदोलन के बाद सरकार ने उच्च स्तरीय जांच कर इस मामले में हाकम सिंह सहित 80 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इनमें कई अभ्यर्थी शिक्षक सरकारी कर्मचारी व नकल माफिया शामिल थे।
इस नकल कांड का सबसे बड़ा चेहरा बना था भाजपा का तत्कालीन वन पंचायत सदस्य हाकम सिंह। हाकम के नेटवर्क ने इतनी गहरी पैठ बना ली थी कि पेपर छपाई केंद्र से लेकर परीक्षा केंद्र तक पूरी जानकारी उसके पास रहती थी। यही वजह थी कि अभ्यर्थियों से लाखों रुपए वसूल कर नकल कराई जाती थी। नकल कराने के इस काले कारनामे की परतें खुलने की शुरुआत सितंबर 2021 की स्नातक स्तर की परीक्षा के पेपर लीक होने के साथ हुई थी। इस परीक्षा में 22 पदों पर भर्ती होनी थी जिसमें एक लाख 20 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। जब रिजल्ट आया तो मेरिट में आए अधिकांश अभ्यर्थी एक ही केंद्र के पाए गए। यहीं से धांधली का खुलासा हुआ। बाद में एसटीएफ की जांच में सामने आया कि पेपर लीक कर बेच दिया गया था। जिसका सरगना और मास्टरमाइंड था हाकम सिंह।


