लंबित मांगों को लेकर आंदोलनकारियों की बैठक, जल्द बड़े धरने की चेतावनी
देहरादून, 14 सितंबर। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से रविवार को शहीद स्मारक पर राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने राज्य आंदोलन के शहीदों के परिजनों और सभी चिन्हित आंदोलनकारियों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का एक्ट पारित किया था, लेकिन आज तक आंदोलनकारियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया है। मंच का कहना है कि इस आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू कराने के लिए अब ठोस रणनीति बनानी होगी।
25 साल बाद भी हो रही अनदेखी
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने की और संचालन संयोजक पूरण सिंह लिंगवाल ने किया। प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती और केशव उनियाल ने इस दौरान कहा कि आंदोलनकारियों ने राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और अपार संघर्ष किया, लेकिन आज 25 साल बाद भी उनकी अनदेखी हो रही है। यह स्थिति बेहद दुखद है और सरकार को आंदोलनकारियों की भावनाओं को समझना होगा।

वरिष्ठ मातृशक्ति पुष्पलता सीलमाणा और टिहरी से आए शिवराज सिंह समेत कई वक्ताओं ने भी सरकार से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री मुजफ्फरनगर कांड की बरसी से पूर्व आंदोलनकारियों की लंबित समस्याओं पर ठोस कदम उठाएं। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहीद परिवारों और आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ेगा और सरकार पर से विश्वास उठ जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंच जल्द ही एक बड़ा धरना आयोजित करेगा। बैठक में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें केशव उनियाल, राजेंद्र सिंह रावत, बीरलाल गैरोला, शिवराज सिंह रावत, खुश्पाल सिंह, विजेंद्र जगूड़ी, प्रदीप कुकरेती, पुष्पलता सीलमाणा, द्वारिका बिष्ट, गणेश डंगवाल, फकीर सिंह रावत, मनोज नौटियाल, रघुवीर सिंह तोमर, विकास रावत, पुष्पा नेगी, महेश्वर कंडारी, बलबीर नेगी, धनंजय घिल्डियाल, विनोद असवाल, प्रभात डंडरियाल, चंद्र किरण राणा, आकाश रावत, पंकज घिल्डियाल, रामेश्वरी नेगी, राजेश पान्थरी और राजेश परमार शामिल रहे।
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