माता मूर्ति से मिलने माणा पहुंचे भगवान बद्रीविशाल, हषोल्लास से मनाया गया माता मूर्ति महोत्सव

अजय कृष्ण मेहता
बद्रीनाथ, 04 सितंबर।उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में वामन द्वादशी के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी माता मूर्ति महोत्सव श्रद्धा और आस्था के विशेष उल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि माता-पुत्र के अटूट बंधन की उस प्राचीन परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है, जो सतयुग से चली आ रही है। परंपरा के अनुसार भगवान बदरीविशाल अपनी माता मूर्ति से मिलने के लिए धाम से माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस दिव्य मिलन का साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटे और पूरा क्षेत्र ‘जय बदरीविशाल’ के जयकारों से गूंज उठा।

सुबह 9:30 बजे मंदिर में बाल भोग के बाद भगवान बदरीविशाल के प्रतिनिधि श्री उद्धव जी तथा आदिगुरु जी की डोली गर्भगृह से बाहर लाई गई। इसी समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए और सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच डोली माणा गांव की ओर रवाना हुई। मार्ग में भक्तों का जोश देखते ही बनता था। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु डोलियों के साथ जयकारे लगाते हुए चल रहे थे और हर ओर भक्ति का एक अलौकिक वातावरण बना हुआ था।

मान्यता के अनुसार, यह परंपरा उस समय से चली आ रही है जब नर-नारायण ने माता मूर्ति से तपस्वी बनने का वरदान मांगा था। माता ने उन्हें वचन दिया था कि वे हर वर्ष एक बार उनसे मिलने आएंगे। उसी आस्था की पूर्ति में आज भी वामन द्वादशी के दिन भगवान बदरीविशाल माता मूर्ति से मिलने पहुँचते हैं।
माणा गांव में डोली का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। गांव की महिलाओं ने जौ की हरियाली अर्पित कर माता-पुत्र मिलन के इस पावन अवसर को और भी दिव्यता प्रदान की। सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद रहे, जबकि इस दौरान भगवान ने माता मूर्ति के मंदिर में भोग और अभिषेक ग्रहण किया।


