मदरसा बोर्ड भंग, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान अधिनियम 2025 को राज्यपाल की मंजूरी

देहरादून, 07 अक्टूबर 2025। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान अधिनियम, 2025 को लागू कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अब प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड गैर-सरकारी अरबी व फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 स्वतः निरस्त हो गए हैं।
नए कानून के तहत अब राज्य में मदरसा बोर्ड समाप्त हो गया है। इसके स्थान पर ऐसा प्रावधान किया गया है जिसके अंतर्गत केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि सभी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समुदाय — जैसे सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी — अपने-अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित कर सकेंगे।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और राज्य के सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर मिलेंगे। साथ ही, यह शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अब मदरसों में अरबी और फारसी के साथ-साथ गुरुमुखी और पाली जैसी भाषाओं की पढ़ाई की भी अनुमति होगी।
फिलहाल राज्यभर में 452 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। पहले मदरसा बोर्ड ही इनके पाठ्यक्रम, परीक्षा और निरीक्षण का कार्य देखता था। अब नई व्यवस्था में मान्यता प्राप्त करने के लिए सख्त नियम लागू होंगे। कोई भी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान तभी मान्यता प्राप्त करेगा जब वह सोसाइटी एक्ट, ट्रस्ट एक्ट या कंपनी एक्ट के तहत विधिवत पंजीकृत होगा और उसकी जमीन, संपत्ति व बैंक खाते संस्थान के नाम पर ही होंगे।
अगर किसी संस्थान में वित्तीय गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी या धार्मिक-सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली गतिविधियां पाई जाती हैं, तो सरकार उसकी मान्यता रद्द कर सकेगी।
हालांकि, मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने इस कदम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 26 और 30 के तहत उन्हें प्राप्त अधिकारों के दायरे को सीमित कर सकता है, जो धार्मिक संस्थान चलाने और शिक्षा संस्थान स्थापित करने की स्वतंत्रता देता है।
वहीं सरकार का तर्क है कि यह नया कानून किसी समुदाय के अधिकारों को सीमित नहीं करता, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और गुणवत्ता को बढ़ावा देता है।
इस कानून के लागू होने से राज्य के हजारों छात्रों के लिए शिक्षा के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। अब वे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापक भाषाई और सामान्य शिक्षा का भी लाभ उठा सकेंगे।


