मिलावटखोर होंगे गिरफ्तार, अब होगी सीधे एफआईआर

देहरादून, 23 सितम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने त्योहारों के मौसम में मिलावटी खाद्य पदार्थों की रोकथाम के लिए बड़ा कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत पूरे राज्य में विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत प्रदेश भर में प्यारी सीजन के दौरान खाद्य सामग्री के सैंपल लेकर उसकी जांच की जाएगी। जांच में यदि मिलावट पाई जाती है तो मिलावटखोरों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि दूध व उसके उत्पाद, तेल, घी, मिठाई, मसाले, आटा, बेसन और सूखे मेवों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। निर्माण इकाइयों से लेकर थोक और खुदरा दुकानों तथा परिवहन चैनलों तक से नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे और यदि उन्हें असुरक्षित पाया गया तो विक्रेताओं पर एफआईआर दर्ज करने से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. कुमार ने कहा कि राज्य की खाद्य प्रयोगशालाओं से हर सप्ताह जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी और उसके आधार पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। Schedule-IV और FSSAI मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होंगे। जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए दिल्ली स्थित भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और उत्तराखंड की मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से भी समन्वय किया जाएगा।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विभाग ने टोल फ्री हेल्पलाइन और WhatsApp नंबर जारी किए हैं, जहां कोई भी नागरिक सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा विभाग सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी जागरूकता अभियान चलाएगा।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने दोहराया कि सभी जिलों के अधिकारियों को छापेमारी और नमूना जांच में कोई लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मिलावटखोरी करने वालों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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