पितृपक्ष की रात दिखेगा ‘Blood Moon’

भारत से साफ दिखाई देगा साल का आखिरी चंद्रग्रहण
देहरादून, 6 सितंबर। भाद्रपद पूर्णिमा की रात आकाश एक अद्भुत नजारे का गवाह बनने जा रहा है। इस बार पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से हो रही है और खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए यह बेहद खास अवसर है। सात और आठ सितंबर की दरमियानी रात को होने वाला यह चंद्रग्रहण भारत समेत कई देशों में साफ-साफ नजर आएगा। खास बात यह है कि इस दौरान चंद्रमा लाल-नारंगी आभा में चमकेगा, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा पर डाल देती है। इस बार पृथ्वी की गहरी छाया यानी ‘अम्ब्रा’ जब चांद पर पड़ेगी तो वह रक्तिम रंग में चमकने लगेगा। यह दृश्य रेले स्कैटरिंग नामक वैज्ञानिक प्रक्रिया की वजह से बनता है, वही प्रक्रिया जो सूरज ढलते समय आकाश को लाल रंग में बदल देती है। यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण को ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। नंगी आंखों से इस घटना को देखना सुरक्षित है, इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होगी।
इस साल का यह दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और 1:26 बजे खत्म होगा। लगभग तीन घंटे 29 मिनट तक लोग इसकी छटा का आनंद ले सकेंगे। ग्रहण का चरम 11:01 बजे रात को होगा। चूंकि यह घटना भारत में रात को होगी, इसलिए पूरे देश से इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। हालांकि अमेरिका जैसे देशों में यह दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय वहां दिन होगा। धार्मिक दृष्टि से देखें तो ग्रहण का सूतक सात सितंबर को दोपहर 12:57 बजे शुरू होकर रात 1:27 बजे तक रहेगा, इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह चंद्रग्रहण खास माना जा रहा है। यह कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस ग्रहण का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ेगा। कहीं आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है तो कहीं स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव की चेतावनी दी जा रही है। हालांकि कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए इसे शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि उनके लिए यह साल का अंतिम चंद्रग्रहण सौभाग्य लेकर आएगा।
आकाश में लालिमा लिए चमकता यह ‘ब्लड मून’ सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्व रखता है। पितृपक्ष के आरंभ के साथ जुड़ा यह अनोखा संयोग इस चंद्रग्रहण को और भी विशेष बना देता है।


