‘पल्लास फिश ईगल’ का स्थाई पता अब कॉर्बेट नेशनल पार्क

देहरादून, 24 अक्टूबर 2025: प्रकृति प्रेमियों के लिए एक सुखद खबर! उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में अब तक प्रवासी पक्षी के रूप में दिखने वाला दुर्लभ पलाश फिश ईगल (Band-Tailed Fish Eagle) ने स्थायी रूप से डेरा डाल दिया है।
यह वही प्रजाति है जो आईयूसीएन की रेड लिस्ट में “लुप्तप्राय (Endangered)” के रूप में दर्ज है। इसका कॉर्बेट में स्थायी रूप से बसना न सिर्फ पारिस्थितिक सफलता की कहानी है, बल्कि उत्तराखंड की बढ़ती जैव-विविधता का भी प्रतीक बन गया है।
कॉर्बेट की नदियाँ बनीं सुरक्षित ठिकाना
कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया —
“ढिकाला जोन की रामगंगा नदी और कालागढ़ डैम क्षेत्र मछलियों से भरपूर हैं, जो इस ईगल के लिए आदर्श भोजन प्रदान करते हैं। अनुकूल जलवायु और समृद्ध पारिस्थितिकी ने ही इसे यहाँ बसने के लिए प्रेरित किया।”
बर्डवॉचर्स के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस ईगल की गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ी हैं। अब यह प्रजनन के लिए घोंसले भी बना रहा है — जो इसके स्थायी निवास का स्पष्ट संकेत है।
संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संरक्षण की रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो आने वाले वर्षों में इस दुर्लभ शिकारी पक्षी की आबादी में वृद्धि तय है।
यह विकास न सिर्फ कॉर्बेट पार्क बल्कि पूरे उत्तराखंड के पर्यावरणीय संतुलन के लिए शुभ संकेत है।
जानिए — पलाश फिश ईगल के बारे में
विशेषता विवरण
वैज्ञानिक नाम Haliaeetus leucoryphus
पहचान पंखों के नीचे और पूंछ पर सफेद बैंडनुमा धारियाँ
आहार मुख्यतः मछलियाँ
निवास झीलों व नदियों के किनारे ऊँचे पेड़ों पर
खतरे मानव गतिविधियाँ, नदी तटीय कटाई, मछलियों की कमी
महत्त्व कॉर्बेट में स्थायी आगमन — संरक्षण की बड़ी उपलब्धि
प्रकृति के पंखों से उड़ी उम्मीद की कहानी
कॉर्बेट का यह नया अध्याय बताता है कि अगर मानव और प्रकृति का संतुलन बनाए रखा जाए, तो लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी लौट सकती हैं।


