प्रकृति के प्रकोप से नेस्तनाबूत हो गया सैलानियों की पहली पसंद सहस्त्रधारा

देहरादून, 16 सितंबर : चारों तरफ पहाड़ को चीरकर फूटती गंधक की सैकड़ों धाराएं। कलरव करती बाल्डी नदी में अठखेलियां करते पर्यटक। हर तरफ हरियाली के बीच चिड़ियों की चहचहाहट के लिए मशहूर सहस्त्रधारा आज प्रकृति के प्रकोप से नेस्तनाबूत हो गया है। जो बाजार कभी सैलानियों से गुलज़ार हुआ करते थे आज वहां हर तरफ मलबा बिखरा पड़ा है। बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं। जो इमारतें खड़ी रह गई उनमें पड़ी दरारें डरा रहीं है। हर तरफ मायूस चेहरे बीती रात की दहशत बयां कर रहे है।

सोमवार की रात नौ बजेे तक लोगों को लगने लगा था कि आज जल प्रलय जैसे हालात बनने लगे हैं। दहशतजदा लोग जान बचाने के लिए फौरन घर, होटल और दुकानों को छोड बाहर की ओर भागे। इसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। उफनती लहरों की राह में आया हर अवरोध तिनके की तरह उड गया। सहस्रधारा में दो वर्ष से लीज पर होटल का संचालन कर रहे सोबत सिंह बताते हैं कि उन्होंने रात नौ बजे नदी का रूप देखा तो फौरन होटल छोड दिया। सुबह वहां था तो सिर्फ मलबे का ढेर। नदी की विकराल लहरों को निहारते 78 वर्ष के शांति प्रसाद बताते हैं कि जीवन में इतनी बडी तबाही वह दूसरी बार देख रहे हैं। मालदेवता को जोडने वालेे पुल की अप्रोच रोड तक वाशआउट हो चुकी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार शाम पांच बजे करीब शुरू हुई बारिश के बीच एकाएक नदी का पानी बढने लगा। जलस्तर को बढते देख लोग सचेत हो गए और सुरक्षित ठिकानों में पनाह ली। मध्य रात्रि को शुरू हुआ तबाही का सिलसिला सुबह चार बजे तक चलता रहा। नदी का वेग सुबह भी भयावह प्रतीत हो रहा था। चाय की दुकान चला रहे एक वृद्ध बोले कुदरत पर तो किसी वश नहीं, लेकिन हमें तो सोचना पडेेगा। मौके पर पहुंची एजेसियां राहत एवं बचाव में जुटी हैं। रास्तों को खोलने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें कितना समय लगेगा कहा नहीं जा सकता।


