सरकारी दफ्तर या आर्ट गैलरी? कबाड़ से कमाई और रचनात्मकता का अनोखा संगम

स्क्रैप से बनी नेताजी की प्रतिमा

सरकारी दफ्तर या आर्ट गैलरी? कबाड़ से कमाई और रचनात्मकता का अनोखा संगम

स्क्रैप से बनी नेताजी की भव्य प्रतिमा
स्क्रैप से बनी नेताजी की भव्य प्रतिमा

नई दिल्ली, 09 सितंबर। सरकारी दफ्तरों की पुरानी छवि अब बदल रही है। जहां कभी धूल-धक्कड़ और फाइलों के ढेर नजर आते थे, वहीं अब आधुनिक सजावट और रचनात्मकता की झलक देखने को मिल रही है। कहीं स्क्रैप से बनी नेताजी की भव्य प्रतिमा है, तो कहीं लॉबी को ‘गोल्डन डियर’ से सजाया गया है। कार्यस्थलों में हरियाली और खेलकूद की सुविधाएं भी नजर आ रही हैं। इस सकारात्मक बदलाव के पीछे केंद्र सरकार का विशेष अभियान 4.0 है, जिसे सबसे प्रभावी ढंग से लागू करने का श्रेय कोयला मंत्रालय को दिया जा रहा है।

सफाई और कमाई: आंकड़ों की कहानी

नवंबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच इस अभियान के तहत:

  • 10,503 मीट्रिक टन स्क्रैप हटाकर ₹55.91 करोड़ की कमाई हुई।

  • 12.18 लाख वर्ग फुट दफ्तर क्षेत्र खाली और पुनः उपयोग योग्य बनाया गया।

  • इन जगहों पर बागवानी, चौड़े मार्ग, पार्किंग, वेटिंग एरिया और खेल स्थल तैयार किए गए।

कबाड़ से कला: इनोवेशन की झलक

अभियान ने यह साबित कर दिया कि कबाड़ सिर्फ बेकार नहीं, बल्कि रचनात्मकता का जरिया भी हो सकता है।

  • बीसीसीएल, धनबाद में स्क्रैप से बनी 7 फुट ऊँची नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति

  • सीएमपीडीआई ने कबाड़ से गढ़ा गोल्डन डियर और फॉन, बिल्कुल आर्ट गैलरी जैसा लुक।

  • कोल इंडिया ने लगाया AI-सक्षम स्मार्ट डस्टबिन, जो खुद तय करता है कि कचरा कहाँ डाला जाए।

  • बेकार पड़ी जगहों को बदला गया टेबल टेनिस कोर्ट में, जिससे कार्यस्थल पर फिटनेस और फ्रेशनेस दोनों जुड़ गए।

सरकारी दफ्तर में सजाया गया गोल्डन डियर
सरकारी दफ्तर में सजाया गया गोल्डन डियर

शिकायतों का समाधान और रिकॉर्ड कवरेज

  • 71,632 फाइलों की समीक्षा, जिनमें से 69,227 का समाधान हुआ।

  • जन शिकायतों और पीएम कार्यालय से जुड़े सभी संदर्भों का 100% निपटारा

  • अभियान को सोशल मीडिया पर जबरदस्त कवरेज मिली: 2163 ट्वीट्स, 1137 प्रेस विज्ञप्तियां और 61 PIB बयान

अब बारी अभियान 5.0 की

सरकार अब अगले चरण की तैयारी में है। विशेष अभियान 5.0 का आयोजन 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक होगा। इसमें मुख्य फोकस रहेगा:

  • ई-कचरे (E-waste) का टिकाऊ निपटान

  • कार्यस्थलों को और पर्यावरण अनुकूल एवं व्यवस्थित बनाना

कोयला मंत्रालय और उसके उपक्रम पहले ही अपनी तैयारी पूरी कर चुके हैं।

सरकारी दफ्तर अब सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि नए सोच और सृजनात्मकता के प्रतीक बनते जा रहे हैं—जहां कभी फाइलों का ढेर और जंग लगा सामान नजर आता था, अब हरियाली, सफाई और कलात्मकता नई पहचान गढ़ रहे हैं।

uncut24x7.com

By Raju Pushola

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

हरित आवरण बचाने और आपदाओं से निपटने पर विशेषज्ञों का साझा मंच

Tue Sep 9 , 2025
हरित आवरण बचाने और आपदाओं से निपटने पर विशेषज्ञों का साझा मंच देहरादून, 09 सितंबर। आईसीएफआरई और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। विशेषज्ञों ने जलवायु प्रतिरोधी शहरों, हरित आवरण और सरकारी पहलों पर अपने विचार साझा किए। मंगलवार को आईसीएफआरई-वन […]
आपदाओं से निपटने पर विशेषज्ञों का साझा मंच

You May Like

Chief Editor

Annu Pushola

Share
error: Content is protected !!