उच्च हिमालयी क्षेत्रों का अध्ययन करेगी वैज्ञानिकों की टीम: सीएम धामी
देहरादून, 24 अगस्त। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थराली आपदा को लेकर उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने विशेष रूप से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मलबा जमा होने के कारणों का अध्ययन करने के लिए एक वैज्ञानिक टीम बनाने का निर्देश दिया, ताकि आपदा के मूल कारणों को समझा जा सके। इसके साथ ही, उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों को तुरंत खोलने और राहत कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर की तैनाती का भी आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि थराली, धराली और स्यानाचट्टी की हाल की आपदाओं में एक बात सामान्य है: पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर बहकर आए हैं। इस समस्या की तह तक जाने के लिए, उन्होंने वाडिया, आईआईआरएस, आईआईटी और एनआरएससी जैसे प्रमुख शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। यह टीम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मोरेन (हिमनदी द्वारा जमा की गई मिट्टी और पत्थर) की मात्रा का अध्ययन करेगी। उन्होंने भारत सरकार से भी अनुरोध किया कि इस तरह का अध्ययन सभी हिमालयी राज्यों में कराया जाए ताकि भविष्य में होने वाली आपदाओं से बेहतर ढंग से निपटा जा सके।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए थराली में एक MI-17 हेलीकॉप्टर को स्टैंडबाय पर रखा गया है, जबकि यूकाडा के हेलीकॉप्टर गौचर में तैनात हैं। राहत टीमों ने कुलसारी और चेपड़ो में हेलीपैड भी सक्रिय कर दिए हैं, जिससे बचाव कार्य और भी आसान हो गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने थराली के आसपास बंद सभी सड़कों को जल्द से जल्द खोलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन सड़कों का खुलना सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) से भी आग्रह किया कि वे अपने नियंत्रण वाली सड़कों को तुरंत ठीक करें। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि वे बीआरओ को हरसंभव सहायता प्रदान करें, जिसमें आवश्यक उपकरण और अन्य संसाधन शामिल हैं।


