उत्तराखंड में पहली बार एशियन कैडेट फेंसिंग कप का आगाज

उत्तराखंड में पहली बार एशियन कैडेट फेंसिंग कप का आगाज

उत्तराखंड में पहली बार एशियन कैडेट फेंसिंग कप का आगाज

उत्तराखंड में पहली बार एशियन कैडेट फेंसिंग कप का आगाज

प्रतियोगिता में एशिया के 17 देशों से 250 खिलाड़ी ले रहे भाग

हल्द्वानी, 20 सितंबर। हल्द्वानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम गौलापार में शुक्रवार को एशियन कैडेट फेंसिंग कप का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर प्रतियोगिता की शुरुआत की और देश-विदेश से आए खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उत्तराखंड में पहली बार आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता में एशिया के 17 देशों से करीब 250 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, जिनमें से 150 भारत के युवा फेंसर हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि खिलाड़ी अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच से न सिर्फ खेलों में सफलता हासिल करेंगे, बल्कि समाज के लिए भी आदर्श बनेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों को नई ऊंचाई देने के लिए लगातार काम कर रही है। “मुख्यमंत्री खेल विकास निधि”, “खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना” और “खेल किट योजना” जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को सम्मान और अवसर देने के लिए 4% खेल कोटा भी फिर से लागू किया गया है। धामी ने कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीतकर पहली बार सातवें स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारतीय खिलाड़ी फेंसिंग में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

इस मौके पर राष्ट्रीय फेंसिंग महासंघ के महासचिव राजीव मेहता ने बताया कि प्रतियोगिता पांच दिन तक चलेगी और 23 सितंबर तक विभिन्न वर्गों में मुकाबले होंगे। इसमें तजाकिस्तान, सीरिया, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। शुभारंभ समारोह में विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, राम सिंह कैड़ा, प्रमोद नैनवाल, उत्तरांचल ओलंपिक संघ के अध्यक्ष महेश नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट समेत कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

क्या होता है ‘फेंसिंग’…

फेंसिंग असल में तलवारबाज़ी का आधुनिक खेल है। इसमें खिलाड़ी हाथ में हल्की तलवार जैसी स्टील की तलवार लेकर आमने-सामने मुकाबला करते हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक निश्चित दूरी होती है और वे कोशिश करते हैं कि तलवार की नोक या धार से तय नियमों के अनुसार सामने वाले को टच करें। हर सही टच पर अंक मिलते हैं। ये खेल बिल्कुल असली लड़ाई जैसा नहीं होता, बल्कि इसमें सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। खिलाड़ी खास सफेद सुरक्षा ड्रेस, मास्क और दस्ताने पहनते हैं ताकि चोट न लगे। मुकाबला इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ा होता है, जिससे यह साफ पता चल जाता है कि किसने अंक बनाया। यह खेल यूरोप से आया, लेकिन अब धीरे-धीरे भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है।

–फेंसिंग में तीन तरह की तलवारें और उनके हिसाब से तीन खेल खेले जाते हैं।

1. फॉइल (Foil)

इसमें इस्तेमाल होने वाली तलवार हल्की और पतली होती है। खिलाड़ी सिर्फ तलवार की नोक (point) से ही अंक बना सकते हैं। अंक तभी मिलेगा जब आप सामने वाले के धड़ (chest, पीठ और पेट वाला हिस्सा) को छूते हैं। यह सबसे बुनियादी और “सीखने वाली” कैटेगरी मानी जाती है।

2. एपे (Épée)

यह तलवार फॉइल से थोड़ी भारी होती है। इसमें भी सिर्फ नोक (point) से अंक बनता है। खास बात यह है कि पूरा शरीर लक्ष्य होता है। यानी सिर से लेकर पैर तक कहीं भी टच करने पर अंक मिल जाता है। इसमें खिलाड़ी बहुत सावधानी से खेलते हैं, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी अंक में बदल सकती है।

3. सेबर (Sabre)

यह तलवार थोड़ी चौड़ी और हल्की होती है। इसमें नोक के साथ-साथ धार (edge) से भी अंक बनाया जा सकता है।
इसमें कमर से ऊपर तक का पूरा हिस्सा (सिर, हाथ, धड़) आता है जिसमें तलवार से टच करके अंक मिलते हैं। यह सबसे तेज़ और रोमांचक फॉर्म है, क्योंकि इसमें वार और बचाव बहुत जल्दी-जल्दी होते हैं।

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By Raju Pushola

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