उत्तराखंड में सहकारिता समझौतों से किसानों को नई ताकत, सहयोग का नया अध्याय शुरू

देहरादून, 18 सितंबर। उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनसे प्रदेश के किसानों और सहकारी समितियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

पहला समझौता भारतीय सहकारी समिति लिमिटेड और उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के बीच हुआ, जिसके जरिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे किसानों की पैदावार और आय दोनों में बढ़ोतरी होगी। वहीं, दूसरा समझौता राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति और राज्य सहकारी संघ के बीच हुआ, जिसके जरिये उत्तराखंड के कृषि उत्पाद सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंचेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस मौके पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक की नई ऋण नीति और वाणिज्यिक अचल संपत्ति-आवासीय गृह ऋण नीति का भी शुभारंभ किया। इन योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें अपने घर का सपना पूरा करने में मदद करना है। कार्यक्रम में सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया गया और दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए गए।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सहकारिता को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं की भूमिका की सराहना की और कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से सेना और अर्धसैनिक बलों तक खाद्यान्न की आपूर्ति करना उत्तराखंड का गर्व है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सहकारिता समाज के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण किया है। अब तक राज्य में 800 पैक्स, 248 नई डेयरी समितियां और 116 मत्स्य समितियां गठित हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत किसानों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जा रहा है।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भी इस अवसर पर घोषणा की कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने सहकारिता क्षेत्र में महिलाओं को 33% आरक्षण और स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का शून्य ब्याज ऋण देने की योजना शुरू की है।
इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता निदेशक कपिल मीणा, राज्य सहकारिता सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम सहित कई अधिकारी, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न जिलों से आई महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं मौजूद रहीं।


